दिनांक:--15-04-2021
कक्षा--सप्तम:
विषय-- संस्कृत
पाठ:--सप्तम:
सिंह मूषक:च।
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व्याख्या----
एक जंगल में एक शेर रहता था। एक बार वह पेड़ के नीचे सोया था। एक चूहा आकर उसके शरीर पर इधर उधर नाचने लगा। उससे शेर जाग गया और वह चूहे पर गुस्सा हुआ। वह चूहा गिड़ गिड़ाया और बोला "हे जंगल के राजा मुझ पर दया कीजिए समय आने पर मैं भी आपकी मदद करूंगा"। यह सुनकर शेर हंसा पर कुछ विचार करके, दया करके उसे छोड़ दिया। एक बार शेर शिकारी के जाल में फँस गया तब वह जोर से दहाड़ा। उसकी दहाड़ को सुनकर चूहा वहां आया और बोला हे जंगल के राजा! दुखी मत होइए मैं अभी जाल को काट दूंगा। तब वह चूहा ने उस जाल को काट दिया। शेर मुक्त हो गया । खुश होकर बोला मैं तुम पर प्रसन्न हूं। हे मित्र चूहे! छोटे जानवरों की भी उपयोगिता होती है मैं आज यह जान गया हूं।
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2. पाठनुसार रिक्तस्थानानि पूरयत।
(क) सिंह
(ख) प्रबुद्ध:
(ग) सहायतां
(घ) व्याघस्य
(ड़) मूषक:
3. अधोलिखितानां परस्परं मेलनं कुरूत।
(क)वने                 वसति
(ख) जालम्          अकृन्तत्
(ग) मूषकाय          अक्रुध्यत्
(घ)दयया               अमुञ्चत्
(ड़)गर्जनम्            आकणर्य
(च)प्रसन्न:                अस्मि
4. उदाहरणानुसार रिक्तस्थानानी पुरयत।
१.उत्+ स्था+ल्यप् = उत्याय
२.वि+हस्+ल्यप् = विहस्य
३.आ+दा+ल्यप् = आदाय
४.आ+नी+ल्यप् = आनीय

दिनांक:--15-04-2021
कक्षा--सप्तम:
विषय-- संस्कृत
पाठ:-- चतुर्थ:
अहम् संगणक: अस्मि।
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इस पाठ में हम कंप्यूटर के आत्मपरिचय के बारे में जानेंगे ।इस पाठ को हम संवाद के माध्यम से पढ़ेंगे। इन वाक्यों के शब्दो में तुमुन् प्रत्यय का प्रयोग हुआ है।
हिंदी अनुवाद:--
कंप्यूटर:-  हे !हे !छात्रों !सुनो, सुनो।
छात्र- अरे ! किसकी आवाज है ?यहां कौन है?
कंप्यूटर-- हे बालकों ! यहां मैं हूं।
छात्र--( देखने के लिए और पास जाकर) तुम्हारा नाम क्या है? तुम कहां रहते हो?
कंप्यूटर--मेरा नाम कंप्यूटर है मैं कहां रहता हूं? यह कठिन पर प्रश्न है। मैं घर घर में रहता हूं।
एक छात्र--नहीं तुम यहां विद्यालय में रहते हो मेरे घर तो तुम नहीं रहते हो।
कंप्यूटर---हां इस समय तुम्हारे घर पर नहीं रहता हूं । जब मेरे साथ तुम्हारा परिचय होगा, तब तुम्हारे घर भी होऊंगा।
एक छात्र--- सच बोलते हो। परिचय बिना तो घर में प्रवेश नहीं होता है।हे कंप्यूटर! तुम्हारा पूरा परिचय क्या है? कैसे इसे जानना संभव होगा?
सभी छात्र तुम्हारा परिचय क्या है ? तुम्हारा परिचय क्या है?( छात्र शोर करते हैं)
कंप्यूटर--हे छात्रों ! शोर बंद करके जब तुम सब ध्यान देकर और मौन होकर सुनने के लिए इच्छुक होगे। तब मैं परिचय देने के लिए तैयार हूं।
  (सभी छात्र मौन होकर बैठते हैं)
छात्र--- श्रीमान कंप्यूटर महोदय! हम सब ध्यान से सुनेंगे।
कंप्यूटर--- सूचनाओं का संग्रह फिर उसकी व्यवस्था, तुरंत प्रदान करना ही मेरा कार्य है ।इसलिए सभी जगह मैं हूँ। जैसे-- विद्यालय की परीक्षा कार्य में अंकपत्र के निर्माण और प्रमाण पत्र बनाने में योगदान करने में समर्थ हूं। मैं इंटरनेट के माध्यम से सूचनाओं की वर्षा करता हूं।
छात्र--कंप्यूटर! इंटरनेट के द्वारा क्या होता है?
कंप्यूटर---इंटरनेट के द्वारा विश्व एक घर होता है घर में ही रेलगाड़ी, हवाई जहाज का आरक्षण, वस्तुओं की खरीद बिक्री, ई-मेल द्वारा संदेश भेजना, वेबकैम के द्वारा चित्र सहित शब्दों और सूचनाओं को भेजना होता है। हे लड़कों ! क्या क्या नहीं होता है ।क्षण मात्र में ही सूचना आती जाती है ।
छात्र--यह अद्भुत है यह जादू है।
कंप्यूटर--लड़कों इंटरनेट ही जादू है। इसलिए मेरा परिचय बहुत जरूरी है।
     (लड़के कंप्यूटर के चारों ओर घूमते और गाते हैं)
कंप्यूटरतुम , कंप्यूटर तुम, निश्चय ही तुम्हारा विकास हुआ है । यहां वहां सभी जगह तुम ही दिखाई देते हो दिन रात तुम्हारी क्रीडा हो रही है।
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2. कोष्ठकस्थधातूनां तुमुन् -- प्रत्ययान्तरुपेण रिक्तस्थानानि पूरयत।
(क)कर्तुम्
(ख) पठितुम्
(ग)दृष्टुम्
(घ)दातुम्
3. शुद्धं रूपं लिखत।
(क)पठितुम्
(ख) खेलितुम्
(ग) खादितुम्
(घ) द्रष्टुम्
(ड़) हसितुम्
4. विलोमानां परस्परं मेलनं कुरूत।
१.श्व:
२.श्याम:
३.मन्द:
४.अन्ते
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By--Preeti Sinha

 

 

 

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गृह कार्य:--
पाठ के शब्दार्थ को साफ-साफ अपनी कॉपी में लिखेंगे और याद करेंगे।

दिनांक:--24-04-2021
कक्षा--सप्तम:
विषय-- संस्कृत
पाठ:-- तृतीय:
गिरीशस्य जन्मदिवस:
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हिंदी अनुवाद :--
गिरीश के जन्मदिन के समारोह में लड़के, लड़कियां, पुरुष और महिलाएं आई हैं। यहां लड़कियां और लड़के सुंदर कपड़े पहन कर इधर-उधर घूमते और बातचीत करते हैं। बुढ़े लोग कुर्सी पर बैठे हैं। गिरीश के पिता अतिथियों का स्वागत करते हैं ।पुरुष और महिलाएं उपहार के वस्तु रमेश के हाथों में देते हैं ,और एक घंटे तक आने वाले अतिथि आते हैं। अनेक प्रकार के उपहार देते हैं गिरीश उपहार लेकर छोटे भाई को देता है। एक तरफ लोग भोजन के लिए जाते हैं ।वहां पुरुष, लड़के और लड़कियां भोजन के पात्र को लेकर अपने मनपसंद खाद्य पदार्थ को लेकर खाते हैं।लोग भोजन के बाद मिठाई खाते हैं।अंत में पानी पीकर इलाइची लौंग आदि खाते हैं।
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पाठ:-- द्वितीय:
पितामहस्य गृहम् अगच्छम् 
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हिंदी अनुवाद:--
विवेक--विमर्श बहुत समय बाद दिखाई दिए हो।
विमर्श--मैं यहां नहीं था।
विवेक--मित्र तुम कहां गए थे?
विमर्श--मैं दादाजी के घर गया था।
विवेक-- तुम्हारे दादा जी कहां हैं?
विमर्श-- मेरे दादाजी वाराणसी शहर में रहते हैं।
विवेक--तुम वहां किस लिए गए थे?
विमर्श--गर्मी की छुट्टी में आनंद के लिए और सामान्य ज्ञान बढ़ाने के लिए।
विवेक-- वह शहर कैसा है?
विमर्श--- बहुत पुराना और सुंदर।
विवेक-- वहां तुमने क्या देखा और कहां घूमने गए?
विमर्श--वहां दादा जी के साथ सवेरे घूमने और कभी-कभी नौका विहार किया।
विवेक--क्या तुमने गंगा में स्नान नहीं किया?
विमर्श-- दोस्त मैं गंगा में स्नान और तैराकी किया।गंगा स्नान में से कौन अर्जित किया और फिर दैनिक कार्यों को कर के मंदिरों में देवताओं की आराधना की संकट मोचन मंदिर में रामायण का सुंदर पाठ भी पढ़ा।
विवेक--- तुमने शाम का समय कैसे व्यतीत किया?
विमर्श-- शाम के समय कहीं भी नहीं गया घर में ही परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत के द्वारा और बीच-बीच में श्लोक पाठ से मनोरंजन किया।
विवेक-- विमर्श तुमने अच्छी तरह से गर्मी की छुट्टी व्यतीत की तुम्हारी मिलने से बहुत लाभ हुआ मैं भी गर्मी की छुट्टी में वाराणसी शहर जाऊंगा।
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गृह कार्य:--
पाठ के शब्दार्थ को साफ-साफ अपनी कॉपी में लिखेंगे और याद करेंगे।

17-04-2021
कक्षा--सप्तम:
विषय-- संस्कृत
पाठ:-- द्वितीय:
पितामहस्य गृहम् अगच्छम् 
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          अभ्यास:
2. रिक्तस्थानानि पूरयत ।
भू  प्रथमपुरुष:--
अभवत्     अभवताम्     अभवन्
मध्यमपुरुष:---
अभव:      अभवतम्      अभवत
उत्तमपुरुष:----
अभवम्     अभवाव       अभवाम
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3.शुद्धं क्रियापदं लिखत।
(क)अहम् अत्र न आसम्।
(ख)त्वं कुत्र आसी:।
(ग)स: पुस्तकम् अपठत्।
(घ)अहम् गृहम् अगच्छम्।
(ड़)त्वं पत्रम् अलिख
4. उचित पदम उचित स्तम्भे लिखत।
लट्                        लड़्
गच्छति                अगच्छत्
गच्छसि                 अगच्छ:            
गच्छामि                 अगच्छम्        
गच्छन्ति                 अगच्छन्
गच्छथ                    अगच्छत ‌ 
गच्छाम:                  अगच्छाम।     
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5. शुद्धं विकल्पं रिक्तस्थाने लिखत।
(क)अगच्छत्
(ख)अकरो:
(ग)अगच्छम्
(घ)अलिख:
(ड़)अकरोत्
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6.अधोलिखितानां परस्परं मेलन कुरूत।
१.स: ---अपठत्
२.त्वम्---अपठ:
३.अहम्---अपठम्
४.तौ--अपठताम्
५.ते---अपठन्
६.युवाम्---अपठतम्
७.यूयम्---अपठत
८.आवाम्---अपठाव
९.वयम्----अपठाम
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7. अधोलिखितानां परदानां मूलधातु:, पुरुष: वचनं च लिखत।
      मूलधातु:    पुरुष:     वचनम् (क)-अस्     उत्तम     एकवचनम् (ख)-गम्     मध्यम्       द्विवचनम्
(ग)- कृ       उत्तम      एकवचनम्
(घ)-पठ      उत्तम       बहुवचनम्
(ड़)-नी      मध्यम्      एकवचनम्
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गृह कार्य
पाठ के शब्दार्थ को साफ-साफ अपनी कॉपी में लिखेंगे और याद करेंगे।

24-3-2021
कक्षा--सप्तम:
विषय-- संस्कृत
पाठ-- प्रथम:
एषा रमा
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          अभ्यास:
2. रिक्तस्थानानि पूरयत ।
छात्रा  प्रथमा--छात्रा  छात्रे  छात्रा:
बालिका  द्वितीया---
बालिकाम्    बालिके     बालिका:
कक्षा  तृतीया---
कक्षाया   कक्षाभ्याम्    कक्षाभि:
लता  चतुर्थी---
लतायै    लताभ्याम्        लताभ्य:
अध्यापिका पंचमी---
अध्यापिकाया: अध्यापिकाभ्याम् अध्यापिकाभ्य:
परिचारिका षष्ठी---
परिचारिकाया: परिचारिकायो: परिचारिकाणाम्
पाठशाला सप्तमी---
पाठशालायाम्   पाठशालायो: पाठशालासु
3. पाठानुसारं शुद्धं कथनं लिखत।
(क)चेतना
(ख) लतिकाया
(ग) दूरदर्शने
(घ) सानिया
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गृह कार्य
पाठ के शब्दार्थ को साफ-साफ अपनी कॉपी में लिखेंगे और याद करेंगे।